Bheelwada Me Ghumne Ki Jagah:भीलवाड़ा में घूमने के 10 अद्भुत स्थान
Piyush Kumar April 15, 2026 0
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भारत कपड़ा उद्योग के लिए विश्वभर में जाना जाता है, और राजस्थान का भीलवाड़ा इस क्षेत्र का एक प्रमुख केंद्र है। मेवाड़ क्षेत्र में स्थित यह शहर टेक्सटाइल उत्पादन और निर्यात में महत्वपूर्ण योगदान देता है। इसी वजह से भीलवाड़ा को “राजस्थान का मैनचेस्टर” और “टेक्सटाइल सिटी” भी कहा जाता है। यह शहर उद्योग के साथ–साथ कई सुंदर पर्यटन स्थलों के लिए भी प्रसिद्ध है। इस लेख में हम आपको भीलवाड़ा की प्रमुख घूमने लायक जगहों के बारे में जानकारी देंगे।
Tourist Places in Bheelwada:भीलवाड़ा में घूमने की जगह
1- मेजा बांध
मेजा बांध भीलवाड़ा के प्रमुख और बड़े बांधों में से एक है। यह स्थान प्राकृतिक सुंदरता और शांत वातावरण के लिए जाना जाता है। बांध के पास बना ग्रीन माउंट पार्क यहां आने वाले पर्यटकों के आकर्षण को और बढ़ाता है। हरियाली से घिरा यह क्षेत्र घूमने, पिकनिक मनाने और परिवार के साथ समय बिताने के लिए एक अच्छा विकल्प माना जाता है। मानसून के दौरान यहां का नजारा विशेष रूप से मनमोहक हो जाता है, जब बांध पानी से लबालब भर जाता है।
2- बदनोर का किला
बदनोर का किला भीलवाड़ा जिले में एक छोटी पहाड़ी के ऊपर स्थित ऐतिहासिक किला है। सात मंजिला संरचना वाला यह किला दूर से ही आकर्षक दिखाई देता है। यह किला मध्यकालीन भारतीय वास्तुकला का सुंदर उदाहरण माना जाता है। यहां से आसपास के क्षेत्र का मनमोहक दृश्य देखने को मिलता है, जो इतिहास प्रेमियों और पर्यटकों को खासा आकर्षित करता है।
3- बागोर साहिब
बागोर साहिब भीलवाड़ा जिले का एक प्रसिद्ध ऐतिहासिक गुरुद्वारा है। मान्यता है कि सिखों के दसवें गुरु गुरु गोविंद सिंह जी अपनी यात्रा के दौरान यहां ठहरे थे। यह स्थान धार्मिक महत्व के साथ-साथ अपने शांत और आध्यात्मिक वातावरण के लिए भी जाना जाता है। श्रद्धालु यहां मत्था टेकने के साथ सुकून भरा समय बिताने आते हैं।
4- जहांजपुर
जहाजपुर भीलवाड़ा जिले का एक ऐतिहासिक स्थान है, जो अपने प्राचीन किले के लिए जाना जाता है। इस किले का निर्माण मेवाड़ की सीमाओं की रक्षा के लिए राणा कुंभा द्वारा कराया गया था। किले की बनावट और यहां के अवशेष उस समय की समृद्ध संस्कृति और स्थापत्य कला की झलक दिखाते हैं। यह स्थान इतिहास और आध्यात्मिकता में रुचि रखने वाले पर्यटकों को विशेष रूप से आकर्षित करता है।
5- मंडलगढ़
मंडलगढ़ भीलवाड़ा जिले का एक ऐतिहासिक स्थान है, जो अपने राजसी किले के लिए प्रसिद्ध है। यह किला ऊंची पहाड़ी पर स्थित होने के कारण दूर से ही आकर्षक दिखाई देता है और इसे स्थापत्य कला का शानदार उदाहरण माना जाता है। इतिहास में यह क्षेत्र विभिन्न शासकों के बीच संघर्ष का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। पहले यहां मुस्लिम शासकों का अधिकार रहा और बाद में मुगल काल में भी यह स्थान सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण युद्ध स्थल के रूप में जाना गया। यहां से आसपास के क्षेत्र का सुंदर दृश्य भी देखने को मिलता है, जो पर्यटकों को आकर्षित करता है।
6- बिजोलिया
बिजोलिया भीलवाड़ा जिले का एक ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व का स्थान है, जो अपने प्राचीन मंदिरों के खंडहरों और समृद्ध कला-वास्तुकला के लिए जाना जाता है। यहां के मंदिरों की दीवारों और वेदियों पर की गई बारीक नक्काशी बेहद आकर्षक और प्रशंसनीय है। शांत वातावरण और ऐतिहासिक महत्व के कारण यह स्थान इतिहास प्रेमियों और पर्यटकों को विशेष रूप से आकर्षित करता है।
7- क्यारा के बालाजी
क्यारा के बालाजी भीलवाड़ा जिले का एक प्राचीन और श्रद्धा का केंद्र माना जाने वाला मंदिर है, जो भगवान हनुमान को समर्पित है। स्थानीय मान्यता के अनुसार यहां चट्टान पर हनुमान जी की छवि प्राकृतिक रूप से प्रकट हुई थी। यही कारण है कि यह स्थान भक्तों के बीच विशेष आस्था का केंद्र बना हुआ है। मंदिर के आसपास का शांत वातावरण और धार्मिक महत्व यहां आने वाले श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है।
8- मेनल वाटरफॉल
मेनल वाटरफॉल भीलवाड़ा जिले का एक खूबसूरत प्राकृतिक स्थल है। लगभग 150 फीट से अधिक ऊंचाई से गिरता यह झरना मेनाल नदी पर स्थित है और खासतौर पर बारिश के मौसम में बेहद आकर्षक दिखाई देता है। मेनाल क्षेत्र को “मिनी खजुराहो मंदिर समूह” भी कहा जाता है, क्योंकि यहां आसपास कई प्राचीन मंदिर मौजूद हैं। प्राकृतिक सुंदरता और ऐतिहासिक मंदिरों का यह संगम पर्यटकों के लिए इस जगह को खास बनाता है।
9- त्रिवेणी
भीलवाड़ा जिले में बनास, बेड़च और मेनाली नदियों का संगम त्रिवेणी के नाम से प्रसिद्ध है। यह स्थान धार्मिक दृष्टि से पवित्र माना जाता है और दूर-दूर से श्रद्धालु यहां स्नान और पूजा के लिए आते हैं। मान्यता के अनुसार इस त्रिवेणी संगम को “छोटा पुष्कर” भी कहा जाता है। शांत वातावरण और धार्मिक महत्व के कारण यह जगह पर्यटकों और श्रद्धालुओं दोनों को आकर्षित करती है।
10- पुर उड़ान छत्री
पुर उड़ान छत्री भीलवाड़ा जिले का एक अनोखा प्राकृतिक और ऐतिहासिक स्थल है। यहां की चट्टानों की बनावट छतरी के आकार जैसी दिखाई देती है, जिस कारण इसे उड़ान छत्री कहा जाता है। यह स्थान आधार शिला महादेव मंदिर के लिए भी प्रसिद्ध है। यहां एक छोटी चट्टान पर टिकी हुई विशाल चट्टान का अद्भुत दृश्य देखने को मिलता है, जो इसे प्राकृतिक भूगोल का अनोखा आश्चर्य बनाता है। यही विशेषता पर्यटकों को इस जगह की ओर आकर्षित करती है।
भीलवाड़ा कैसे पहुंचे
सड़क मार्ग से भीलवाड़ा पहुंचना काफी आसान है। राष्ट्रीय राजमार्ग 758 और राष्ट्रीय राजमार्ग 79 इस शहर से होकर गुजरते हैं, जिससे राजस्थान के कई प्रमुख शहरों से अच्छी कनेक्टिविटी मिलती है। इन मार्गों के जरिए आप निजी वाहन या बस से आसानी से भीलवाड़ा पहुंच सकते हैं।
रेल मार्ग की बात करें तो भीलवाड़ा रेलवे स्टेशन आसपास के प्रमुख शहरों से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। यहां के लिए नियमित ट्रेन सेवाएं उपलब्ध हैं, जिससे रेल द्वारा यात्रा करना सुविधाजनक रहता है।
हवाई मार्ग से आने वाले यात्रियों के लिए निकटतम हवाई अड्डा किशनगढ़ हवाई अड्डा है। यह भीलवाड़ा से लगभग 2 घंटे की दूरी पर स्थित है। हवाई अड्डे से टैक्सी या बस के माध्यम से आसानी से भीलवाड़ा पहुंचा जा सकता है।
जोधपुर घूमने जाने का उचित समय
भीलवाड़ा घूमने के लिए अक्टूबर से मार्च का समय सबसे अच्छा माना जाता है, क्योंकि इस दौरान मौसम सुहावना रहता है और दर्शनीय स्थलों को आराम से देखा जा सकता है। वहीं, मानसून के मौसम यानी जुलाई से सितंबर के बीच भी यहां की प्राकृतिक सुंदरता निखर जाती है, खासकर झरनों और बांधों का दृश्य बेहद आकर्षक हो जाता है। गर्मियों में तापमान अधिक होने के कारण यात्रा थोड़ी असुविधाजनक हो सकती है, इसलिए इस समय घूमने से बचना बेहतर रहता है।
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