Mallikārjuna Jyotirlinga Temple in Andhra Pradesh- मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग मंदिर
Piyush Kumar April 3, 2026 0
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ToggleMallikārjuna Temple -मल्लिकार्जुन मंदिर की सम्पूर्ण जानकारी
Mallikarjuna Temple भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक प्रमुख तीर्थ स्थल है, जो आंध्र प्रदेश के श्रीशैलम क्षेत्र में स्थित है।
यह पवित्र मंदिर नल्लामाला पहाड़ियों की ऊंचाई पर स्थित है, जिसके पास से Krishna River बहती है। यहां का प्राकृतिक वातावरण और हरियाली श्रद्धालुओं को एक अद्भुत आध्यात्मिक अनुभव प्रदान करती है।
मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग भगवान Shiva और माता Parvati को समर्पित है। इस मंदिर की विशेषता यह है कि यहां शिव और पार्वती दोनों की पूजा एक साथ की जाती है, जो इसे अन्य ज्योतिर्लिंगों से अलग बनाती है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान शिव स्वयं इस स्थान पर प्रकट हुए थे, जिसके कारण यह स्थान सनातन धर्म में अत्यंत पवित्र माना जाता है। भारत में स्थित 12 ज्योतिर्लिंगों में मल्लिकार्जुन (श्रीशैलम) का विशेष स्थान है।
👉 प्राकृतिक सुंदरता और गहरी आस्था का संगम होने के कारण यह मंदिर श्रद्धालुओं के लिए बेहद खास माना जाता है।
मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग का इतिहास(History of Mallikārjuna Temple)
Mallikarjuna Temple का इतिहास और कथा अत्यंत रोचक और धार्मिक महत्व से जुड़ी हुई है।
पौराणिक मान्यता के अनुसार, भगवान Shiva और माता Parvati अपने पुत्रों Ganesha और Kartikeya का विवाह करना चाहते थे। लेकिन यह निर्णय करना कठिन था कि पहले किसका विवाह हो।
तब एक शर्त रखी गई कि जो पहले पूरे संसार का चक्कर लगाकर आएगा, उसी का विवाह पहले किया जाएगा। यह सुनकर कार्तिकेय तुरंत अपने वाहन मोर पर सवार होकर पृथ्वी की परिक्रमा करने निकल पड़े।
वहीं गणेश जी ने बुद्धिमानी से अपने माता–पिता की परिक्रमा कर ली और कहा कि माता–पिता ही उनके लिए पूरा संसार हैं। उनकी इस भक्ति और बुद्धि से प्रसन्न होकर उनका विवाह पहले रिद्धि और सिद्धि से कर दिया गया।
जब कार्तिकेय वापस लौटे और यह बात जानी, तो वे दुखी होकर Srisailam के श्रीगिरि पर्वत पर चले गए और वहीं रहने लगे। अपने पुत्र से मिलने भगवान शिव और माता पार्वती भी वहां पहुंचे और उसी स्थान पर विराजमान हो गए।
इसी कारण वहां भगवान शिव के ज्योतिर्लिंग और माता पार्वती के शक्तिपीठ की स्थापना हुई।
मल्लिकार्जुन नाम का अर्थ:
ऐसी मान्यता है कि अमावस्या की रात भगवान शिव “अर्जुन” रूप में और पूर्णिमा की रात माता पार्वती “मल्लिका” रूप में प्रकट होती हैं। इसी से इस स्थान का नाम “मल्लिकार्जुन” पड़ा।
👉 इस कथा के कारण मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग को विशेष आध्यात्मिक महत्व प्राप्त है और यह भक्तों के लिए अत्यंत पवित्र तीर्थ माना जाता है।
Srisailam Temple Lingam
Mallikarjuna Temple में स्थित ज्योतिर्लिंग को अत्यंत पवित्र और दिव्य माना जाता है। Srisailam एक छोटा लेकिन प्रसिद्ध तीर्थ स्थल है, जो इस मंदिर के कारण देशभर में जाना जाता है।
ज्योतिर्लिंग का अर्थ:
ज्योतिर्लिंग का अर्थ “प्रकाश का स्तंभ” होता है, जो अनंत शक्ति का प्रतीक है—जिसका न आदि है और न अंत।
पौराणिक कथा के अनुसार, जब Brahma और Vishnu के बीच यह विवाद हुआ कि सर्वोच्च देवता कौन है, तब Shiva एक अनंत प्रकाश स्तंभ के रूप में प्रकट हुए। उन्होंने दोनों को उस स्तंभ का आदि और अंत खोजने के लिए कहा, लेकिन कोई भी सफल नहीं हो सका।
मान्यता है कि जहां–जहां इस दिव्य प्रकाश के अंश प्रकट हुए, वहीं ज्योतिर्लिंग स्थापित हुए। भारत में ऐसे 12 ज्योतिर्लिंग हैं, जिनमें मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग भी शामिल है।
ऐतिहासिक योगदान:
मल्लिकार्जुन मंदिर के निर्माण और संरक्षण में कई राजवंशों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। इसके प्रमाण पहली सदी के Satavahana Empire के अभिलेखों में मिलते हैं। इसके बाद Ikshvaku dynasty, Pallava dynasty, Chalukya dynasty और Reddy dynasty ने भी मंदिर के विकास में योगदान दिया।
बाद में Vijayanagara Empire और Chhatrapati Shivaji Maharaj ने भी मंदिर के निर्माण और सुधार कार्यों में सहयोग दिया।
👉 इस प्रकार मल्लिकार्जुन मंदिर न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि इसका इतिहास भी विभिन्न राजवंशों और शासकों के संरक्षण का प्रमाण है।
मल्लिकार्जुन मंदिर कहा स्थित है (Mallikarjuna Temple Location)
Mallikarjuna Temple आंध्र प्रदेश के Kurnool district में स्थित Srisailam कस्बे में नल्लामाला पहाड़ियों पर स्थित है।
जिस पहाड़ी पर यह पवित्र मंदिर बना हुआ है, उसे श्री पर्वत, श्रीगिरि, श्रीनागम और सिरिधन जैसे विभिन्न नामों से भी जाना जाता है।
👉 प्राकृतिक सुंदरता और धार्मिक महत्व के कारण यह स्थान श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए अत्यंत खास माना जाता है।
मल्लिकार्जुन मंदिर कैसे पहुंचे (How To Reach Mallikarjuna Jyotirlinga Temple By Foot)
Mallikarjuna Temple तक पहुँचने के कई तरीके हैं—पैदल, सड़क, रेल और हवाई मार्ग से।
🚶♂️ पैदल (By Foot)
श्रीशैलम की पैदल यात्रा विशेष अवसरों जैसे Maha Shivaratri और Ugadi पर अनुमति दी जाती है।
यह यात्रा Atmakur से शुरू होकर नल्लामाला पहाड़ियों के घने जंगलों से गुजरते हुए श्रीशैलम तक पहुंचती है।
यात्रियों को इस दौरान अपने साथ पानी और भोजन रखना जरूरी होता है। मान्यता है कि पैदल यात्रा करने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
🚗 सड़क मार्ग (By Road)
श्रीशैलम पहुंचने के लिए मुख्यतः दो रास्ते हैं—दोरनाला और अचंपेट।
Dornala और आसपास के क्षेत्रों से नियमित बस सेवाएं उपलब्ध रहती हैं, जिससे यात्रा आसान हो जाती है।
🚆 रेल मार्ग (By Train)
सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन Markapur है, जो श्रीशैलम से लगभग 90 किमी दूर स्थित है। यहां से टैक्सी या बस के माध्यम से मंदिर तक पहुंचा जा सकता है।
✈️ हवाई मार्ग (By Air)
- सबसे नजदीकी एयरपोर्ट: Kurnool Airport (लगभग 180 किमी)
- प्रमुख एयरपोर्ट: Rajiv Gandhi International Airport (लगभग 217 किमी)
👉 इस प्रकार आप अपनी सुविधा और बजट के अनुसार किसी भी माध्यम से श्रीशैलम पहुंचकर मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग के दर्शन कर सकते हैं।
Mallikarjun Temple Timing
Mallikarjun mandir में सुबह 4:30 बजे से रात 10 बजे तक प्रवेश की अनुमति है.
Mallilarjun Mandir Aarti Timing
महामंगल आरती (सुबह) : 5:00 am
महामंगल आरती (शाम) : 5:00 pm
Mallilarjun Jyotirlinga Mandir Darshan Timing
डेली दर्शन – 4:30 am से 10:00 pm
सुप्रभात दर्शन – 5:00 am
सुबह के दर्शन – 6:00 am से 3:30 pm
संध्या दर्शन– 6:00 am से 10:00 pm
Srisailam Mandir Online Darshan Booking
Srisailam Mandir Online Darshan Booking की 3 प्रकार की सुविधा प्राप्त है. जिसके लिए आपको टिकेट खरीदना पड़ता है. जोकि आप मंदिर की official website पर जाकर बुक करा सकते हैं.
शिग्र दर्शन – 150 रुपए
अतिशिग्र दर्शन – 300 रुपए
VIP ब्रेक दर्शन – 500 रुपए
Dharamshala near To Mallikarjuna Temple
Mallikarjuna Temple के पास ठहरने के लिए कई किफायती धर्मशालाएं (तेलुगु में “सतराम”) उपलब्ध हैं। मंदिर और बस स्टैंड से लगभग 500 मीटर के भीतर ही आपको अच्छी और बजट–फ्रेंडली रहने की सुविधा मिल जाती है।
प्रमुख धर्मशालाओं में—करिकाला सतराम, देवांगा सतराम, वेलामा सतराम और श्री विद्या पीठम शामिल हैं।
ये धर्मशालाएं साधारण लेकिन आरामदायक सुविधाएं प्रदान करती हैं, जो तीर्थयात्रियों के लिए किफायती विकल्प मानी जाती हैं। इनमें से कई स्थानों पर आप ऑनलाइन बुकिंग की सुविधा का भी लाभ उठा सकते हैं।
👉 यदि आप बजट में रहकर यात्रा करना चाहते हैं, तो ये धर्मशालाएं एक अच्छा विकल्प साबित होती हैं।
Srisailam Temple Accommodation
Mallikarjuna Temple के पास ठहरने के लिए कई अच्छे विकल्प उपलब्ध हैं, जहां यात्रियों को अपनी सुविधा और बजट के अनुसार रहने की व्यवस्था मिल जाती है।
मंदिर के आसपास आपको AC और Non-AC रूम वाली होटल आसानी से मिल जाएंगी। यहां 3-स्टार से लेकर बेहतर सुविधाओं वाली प्रीमियम होटल भी उपलब्ध हैं।
इसके अलावा, श्रीशैलम में आपको—
- गेस्ट हाउस
- कॉटेज
- लॉज
जैसे विकल्प भी मिलते हैं, जो परिवार और ग्रुप में यात्रा करने वालों के लिए उपयुक्त रहते हैं।
👉 कुल मिलाकर, श्रीशैलम में हर बजट के अनुसार रहने की अच्छी व्यवस्था है, जिससे तीर्थयात्रियों को किसी भी तरह की परेशानी नहीं होती।
मल्लिकार्जुन मंदिर जाने का उत्तम समय (Best Time To Visit Mallikarjuna Mandir)
अक्टूबर से फरवरी के बीच Srisailam का मौसम सुहावना रहता है, जहां तापमान लगभग 14°C से 24°C के बीच होता है। इस दौरान मंदिर दर्शन और आसपास घूमना काफी आरामदायक रहता है।
👉 गर्मियों में यहां तापमान अधिक हो सकता है, जबकि बरसात के मौसम में यात्रा थोड़ी कठिन हो सकती है। इसलिए सर्दियों का समय श्रीशैलम यात्रा के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है।
मंदिर के आस पास घूमने लायक अन्य स्थान (Places to Visit Near Mallikarjuna Temple)
मलिकर्जुन मंदिर के अलावा श्रीशैलम में और भी जगह घूमने के लिए जा सकते हैं.
साक्षी गणपति: Sakshi Ganapati Temple श्रीशैलम से लगभग 3 किमी की दूरी पर स्थित एक प्रसिद्ध मंदिर है। यहां भगवान गणपति की विशेष मूर्ति स्थापित है, जिसमें वे एक हाथ में किताब और दूसरे हाथ में कलम धारण किए हुए दिखाई देते हैं।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान गणपति यहां आने वाले श्रद्धालुओं के श्रीशैलम दर्शन का साक्ष्य (गवाह) रखते हैं। इसलिए मल्लिकार्जुन मंदिर के दर्शन से पहले या बाद में इस मंदिर में दर्शन करना शुभ माना जाता है।
हटकेश्वरम: Hatakeshwaram Temple श्रीशैलम से लगभग 5 किमी की दूरी पर स्थित भगवान शिव का एक प्राचीन मंदिर है।
मान्यता के अनुसार, यहां भगवान Shiva ने एक मटकी (अटिका) में दर्शन दिए थे, जिसके कारण इस स्थान का प्रारंभिक नाम अटिकेश्वरम पड़ा। समय के साथ इसका नाम बदलकर हटकेश्वरम हो गया।
यह मंदिर शांत वातावरण और गहरी आस्था के कारण श्रद्धालुओं के बीच विशेष महत्व रखता है।
शिकरेश्वरम: Shikhareswaram Temple श्रीशैलम से लगभग 8 किमी की दूरी पर स्थित एक प्रसिद्ध मंदिर है।
यह मंदिर समुद्र तल से लगभग 2830 फीट की ऊंचाई पर स्थित है और पत्थरों से निर्मित इसकी संरचना इसे और भी खास बनाती है।
👉 यहां से आसपास के पहाड़ों और प्राकृतिक दृश्यों का अद्भुत नजारा देखने को मिलता है, जो इसे श्रद्धालुओं और पर्यटकों दोनों के लिए आकर्षण का केंद्र बनाता है।
फलधारा पुंछधरा: Phaladhara Panchadhara श्रीशैलम से लगभग 8 किमी की दूरी पर स्थित एक पवित्र और शांत स्थान है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, यहां Adi Shankaracharya ने तपस्या की थी। यह स्थान अपनी प्राकृतिक सुंदरता, बहते जलधाराओं और आध्यात्मिक वातावरण के लिए प्रसिद्ध है।
अक्का महादेवी की गुफ़ाएँ: ये गुफ़ाएँ श्रीशैलम से 10 kms दूरी पर है, ऐसी मान्यता है कि अक्कामहादेवी ने इन गुफ़ाओ में तपस्या करी थी.
Conclusion
आज के इस ब्लॉग के माध्यम से आपने Mallikarjuna Temple (श्रीशैलम) से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त की। इसमें मंदिर का इतिहास, यात्रा करने के तरीके, ऑनलाइन दर्शन बुकिंग और अन्य जरूरी जानकारियां शामिल थीं।
साथ ही आपने आसपास के दर्शनीय स्थलों और नजदीकी रेलवे स्टेशन के बारे में भी जाना।
👉 उम्मीद है कि यह जानकारी आपकी यात्रा को आसान और बेहतर बनाने में मदद करेगी। अगर आपको यह ब्लॉग उपयोगी लगा हो, तो इसे अपने दोस्तों के साथ जरूर शेयर करें।
