Grishneshwar Temple in Hindi: जानिये करुणा के स्वामी भगवान घृणेश्वर नाथ के बारे में
Piyush Kumar April 3, 2026 0
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ToggleGrishneshwar Temple in Aurangabad-घृष्णेश्वर मंदिर की सम्पूर्ण जानकारी
घृष्णेश्वर मंदिर में भगवान शिव ज्योतिर्लिंग रूप में विराजमान हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग भगवान शिव के बारह ज्योतिर्लिंगों में अंतिम यानी बारहवाँ ज्योतिर्लिंग माना जाता है। यह मंदिर श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत पवित्र और महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल है।
‘घृष्णेश्वर’ शब्द का अर्थ करुणा के स्वामी से जुड़ा माना जाता है। मान्यता है कि यहाँ भगवान शिव भक्तों की प्रार्थनाएँ सुनते हैं और उन्हें आशीर्वाद प्रदान करते हैं। प्राचीन ग्रंथों में इस ज्योतिर्लिंग को प्रकाश स्वरूप शिवलिंग भी कहा गया है, जो आध्यात्मिक ऊर्जा और दिव्यता का प्रतीक माना जाता है।
घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग कहाँ स्थित है (Grishneshwar Jyotirlinga Location)
घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग महाराष्ट्र राज्य में औरंगाबाद शहर से लगभग 30 किलोमीटर उत्तर–पश्चिम दिशा में वेरुल (एलोरा) गाँव के पास स्थित है। यह मंदिर प्रसिद्ध एलोरा गुफाओं के निकट होने के कारण धार्मिक के साथ–साथ ऐतिहासिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जाता है। श्रद्धालु और पर्यटक यहाँ भगवान शिव के दर्शन के साथ एलोरा की प्राचीन गुफाओं का भी भ्रमण करते हैं।
घृणेश्वर मंदिर ज्योतिर्लिंग दर्शन महत्व -GHRINESHWAR JYOTIRLING DARSHAN IMPORTANCE
- घृणेश्वर मंदिर में विराजमान ज्योतिर्लिंग को करुणा का स्वामी कहा जाता है।
- इसलिए जो भी व्यक्ति यहाँ दर्शन के लिए अत है प्रभु उन के कष्ट हर लेते है।
- पुराणों में कहा जाता है की जो भी व्यक्ति यहाँ आकर भगवान् शिव की पूजा कर लेता है वह सभी ज्योतिर्लिंगों की पूजा कर लेता है।
- घृणेश्वर मंदिर में शिवलिंग का मुख पूर्व की ओर विराजमान है इसलिए यहाँ दर्शन करने का महत्व औऱ अधिक बढ़ जाता है।
- घृणेश्वर मंदिर में कोई यज्ञ , अनुष्ठान या बलिदान नहीं होता है। इसलिए भी यहाँ दर्शन का विशेष महत्व। यहाँ प्रभु सबके कष्ट हरते है। किसी को भी किसी प्रकार का कष्ट नहीं देते है।
यहाँ कोई भी व्यक्ति भगवान् शिव का आशीर्वाद लेने के लिए गर्भग्रह में प्रवेश कर सकता है।
घृष्णेश्वर मंदिर का इतिहास (Ghrishneshwar Temple History)
ऐतिहासिक साक्ष्यों के अनुसार, घृष्णेश्वर मंदिर का निर्माण 13वीं शताब्दी से पहले का माना जाता है। समय–समय पर हुए आक्रमणों के कारण मंदिर को कई बार क्षति पहुँची। 14वीं शताब्दी के दौरान दिल्ली सल्तनत के शासकों ने इस मंदिर को नष्ट कर दिया था।
बाद में 16वीं शताब्दी में मराठा सरदार मालोजी भोसले ने मंदिर का पुनर्निर्माण कराया। इसके पश्चात भी मुगल काल में मंदिर को कई बार नुकसान पहुँचा।
मुगल साम्राज्य के पतन के बाद 18वीं शताब्दी में इंदौर की महारानी अहिल्याबाई होल्कर ने मंदिर का फिर से भव्य पुनर्निर्माण करवाया। वर्तमान में दिखाई देने वाली मंदिर की संरचना मुख्यतः अहिल्याबाई होल्कर द्वारा बनवाई गई मानी जाती है।
घृष्णेश्वर मंदिर संरचना (Ghrishneshwar Temple Structure)
घृष्णेश्वर मंदिर का निर्माण पारंपरिक दक्षिण भारतीय शैली में किया गया है। मंदिर का शिखर बहु–स्तरीय संरचना वाला है, जो इसकी भव्यता को दर्शाता है। यह मंदिर मुख्य रूप से लाल पत्थरों से निर्मित है, जिससे इसकी वास्तुकला और भी आकर्षक दिखाई देती है।
मंदिर परिसर में एक विशाल सभा मंडप (हॉल) बना हुआ है, जो 24 स्तंभों पर टिका है। इन स्तंभों पर भगवान शिव से जुड़ी पौराणिक कथाओं और विभिन्न धार्मिक आकृतियों की सुंदर नक्काशी देखने को मिलती है।
मंदिर में गर्भगृह भी स्थित है, जहाँ भगवान शिव शिवलिंग रूप में विराजमान हैं। शिवलिंग पूर्व दिशा की ओर स्थापित माना जाता है। परिसर में भगवान विष्णु के दशावतार से संबंधित आकृतियाँ भी दर्शाई गई हैं। इसके अलावा यहाँ अन्य देवी–देवताओं की मूर्तियाँ और नंदी महाराज की प्रतिमा भी स्थापित है।
घृणेश्वर मंदिर दर्शन समय-GHRINESHWAR TEMPLE DARSHAN TIMING
सुबह – 5 :30 से शाम 9 :30 तक
प्रात काल पूजा – सुबह 6 बजे
दोपहर पूजा – दोपहर 1 बजे
सायं काल पूजा – शाम 5 बजे
मंगल आरती सुबह -4 बजे
जलधारी संगम – सुबह 8 बजे
महा प्रसाद – दोपहर 12 बजे
संध्या आरती – शाम 7:30 बजे
रात्रि आरती – रात 9:30 बजे
घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर जाने का उत्तम समय (Best Time to Visit Ghrishneshwar Temple)
घृष्णेश्वर मंदिर की यात्रा वर्ष भर की जा सकती है। हालांकि, सर्दियों के महीनों में मौसम सुहावना होने के कारण दर्शन करना अधिक सुविधाजनक रहता है।
इसके अलावा महाशिवरात्रि, श्रावण मास और गणेश चतुर्थी जैसे प्रमुख त्योहारों के दौरान यहाँ विशेष पूजा–अर्चना और सजावट की जाती है। इन अवसरों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं और आसपास के क्षेत्रों में मेलों का भी आयोजन होता है, जिससे मंदिर का वातावरण और अधिक भक्तिमय हो जाता है।
घृणेश्वर मंदिर के पास घूमने लायक अन्य स्थान-PLACES TO VISIT NEAR BY GHRINESHWAR
एलोरा दिगंबर जैन मंदिर
एलोरा दिगंबर जैन मंदिर घृष्णेश्वर मंदिर से मात्र लगभग 600 मीटर की दूरी पर स्थित है। यह मंदिर अपनी सुंदर नक्काशी और शांत वातावरण के लिए जाना जाता है।
यदि आप घृष्णेश्वर मंदिर दर्शन के लिए आते हैं, तो समय निकालकर इस जैन मंदिर का भी भ्रमण कर सकते हैं। यहाँ की स्थापत्य कला और आध्यात्मिक वातावरण श्रद्धालुओं और पर्यटकों दोनों को आकर्षित करता है।
एलोरा की गुफाएँ
एलोरा की गुफाएँ घृष्णेश्वर मंदिर से लगभग 2 किलोमीटर की दूरी पर स्थित हैं। यह स्थान प्राचीन भारतीय कला, वास्तुकला और इतिहास का महत्वपूर्ण उदाहरण माना जाता है। यहाँ आने वाले पर्यटक विभिन्न कालखंडों से जुड़े मंदिर, गुफाएँ और अद्भुत शिल्पकला को करीब से देख सकते हैं।
एलोरा की गुफाओं में प्राचीन भित्ति चित्र, नक्काशी और पत्थरों को काटकर बनाई गई संरचनाएँ देखने को मिलती हैं। यहाँ की कलाकृतियाँ अपनी विशिष्ट शैली के कारण खास मानी जाती हैं और भारत की प्राचीन सांस्कृतिक विरासत की झलक प्रस्तुत करती हैं।
दौलताबाद का किला
दौलताबाद का किला घृष्णेश्वर मंदिर से लगभग 16 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह किला अपनी अनोखी बनावट और मजबूत संरचना के लिए प्रसिद्ध है। त्रिकोणीय आकार में बना यह किला रणनीतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता था, जो इसे अन्य किलों से अलग बनाता है।
महाराष्ट्र की ऐतिहासिक धरोहरों में दौलताबाद का किला एक खास स्थान रखता है। यहाँ की प्राचीन दीवारें, प्रवेश द्वार और ऊँचाई पर स्थित संरचनाएँ इतिहास की झलक प्रस्तुत करती हैं। इतिहास में रुचि रखने वाले पर्यटकों के लिए यह स्थान अवश्य देखने योग्य है।
भद्रा मारुति मंदिर
भद्रा मारुति मंदिर भगवान हनुमान जी को समर्पित एक प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है। इस मंदिर की विशेषता यह है कि यहाँ हनुमान जी शयन अवस्था में विराजमान हैं, जो बहुत कम स्थानों पर देखने को मिलता है। मंदिर में स्थापित हनुमान जी की प्रतिमा पूरी तरह सिंदूर से आच्छादित रहती है, जो श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र है।
यह मंदिर घृष्णेश्वर मंदिर से लगभग 5 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन के साथ श्रद्धालु यहाँ आकर हनुमान जी का आशीर्वाद भी प्राप्त करते हैं।
लोनार क्रेटर झील
लोनार क्रेटर झील एक अनोखी प्राकृतिक झील है, जो उल्कापिंड के पृथ्वी से टकराने के कारण बनी मानी जाती है। यही विशेषता इसे बेहद खास बनाती है। यह झील चारों ओर से हरियाली और पहाड़ियों से घिरी हुई है, जिससे यहाँ का दृश्य बहुत आकर्षक दिखाई देता है।
यहाँ विभिन्न प्रकार के पक्षी, वन्यजीव और वनस्पतियाँ भी देखने को मिलती हैं, जो प्रकृति प्रेमियों के लिए इसे एक बेहतरीन स्थान बनाती हैं। लोनार क्रेटर झील घृष्णेश्वर मंदिर से लगभग 169 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है, इसलिए समय मिलने पर इसे भी यात्रा में शामिल किया जा सकता है।
घृणेश्वर मंदिर के निकट धर्मशाला और होटल्स-DHARMSHALA AND HOTELS NEAR BY GHRINESHWAR TEMPLE
- एलोरा ओम सिद्देश्वर भक्त निवास धाम धर्मशाला
यह धर्मशाला घृणेश्वर मंदिर से5 किलोमीटर दूरी पर स्थित है । - होटल कैलास
होटल कैलास मंदिर के बेहद पास है आप मंदिर आये तो यहाँ भी रुक सकते है । होटल कैलाश घृणेश्वर मंदिर से5 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है । - एलोरा हेरिटेज रिसोर्ट
एलोरा रिसोर्ट मंदिर से5 किलो मीटर की दूरी पर स्थित है । - पेस होटल
पेस होटल घृणेश्वर मंदिर से1 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है । आप यहाँ भी आकर रुक सकते है । - होटल कार्तिक
होटल कार्तिक औरंगाबाद में स्थित है। यह होटल घृणेश्वर मंदिर से करीब 20 किलोमीटर दूरी पर है ।
कैसे पहुंचे घृणेश्वर ज्योतिर्लिंग-HOW TO REACH GHRINESHWAR JYOTIRLING
घृणेश्वर मंदिर पहुंचने के लिए आप फ्लाइट, ट्रैन या बस किसी का भी उपयोग कर सकते है।
औरंगाबाद एयरपोर्ट – आप फ्लाइट द्वारा भी घृणेश्वर ज्योतिर्लिंग पहुंच सकते है। इसके लिए आप औरंगाबाद एयरपोर्ट पर उतर कर वहाँ से कैब या टैक्सी कर सकते है।औरंगाबाद एयरपोर्ट से घृणेश्वर मंदिर की दूरी 29 किलोमीटर है।
औरंगाबाद रेलवे स्टेशन – आप ट्रैन द्वारा भी घृणेश्वर ज्योतिर्लिंग पहुंच सकते है। इसके लिए आप औरंगाबाद रेलवे स्टेशन पर उतर कर वहाँ से कैब या टैक्सी कर सकते है। औरंगाबाद रेलवे स्टेशन से घृणेश्वर मंदिर की दूरी 22 किलोमीटर है ।
